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बीए सेमेस्टर-3 अर्थशास्त्र

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2022
पृष्ठ :171
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2640
आईएसबीएन :000000000

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बीए सेमेस्टर-3 अर्थशास्त्र : सरल प्रश्नोत्तर

अध्याय - 12

परम्परावादी अर्थशास्त्री : डेविड रिकार्डो

(Classical Economist : David Recardo)

 

प्रश्न- "रिकार्डों का मुख्य योगदान मूल्य सिद्धान्त तथा वितरण सिद्धान्त के क्षेत्र में है। " व्याख्या कीजिए।

अथवा
रिकार्डो का मूल्य सिद्धान्त बताइये।
अथवा
वितरण के क्षेत्र में डेविड रिकार्डो के विचारों की विवेचना कीजिए।
अथवा
रिकार्डो के मूल्य व वितरण के सिद्धान्तों को समझाएये और स्पष्ट कीजिये कि वह तत्कालीन परिस्थितियों से किस प्रकार प्रभावित हुआ था?

उत्तर-

रिकार्डों मुख्यतया अपनी पुस्तक 'Principles of Political Economy and Taxation' के लिए प्रसिद्ध था। पुस्तक की प्रस्तावना में उसने अपने उद्देश्य को पूर्णतया स्पष्ट कर दिया है। वह कहता है कि भूमि की उपज जो श्रम, मशीन और पूँजी के सम्मिलित प्रयास से भूमि की सतह से निकाली जाती है क्रमशः तीनों हिस्सों में लगान, लाभ और मजदूरी में बाँटी जाती है। उसका मानना था कि इनके आपसी अनुपात को नियमित करने वाले नियमों का निर्धारण राजनीतिक अर्थनीति की मुख्य समस्या है।

मूल्य सिद्धान्त
(Theory of Price)

मूल्य निर्धारण के सम्बन्ध में रिकार्डों ने स्मिथ के मार्ग को अपनाया। प्रारम्भ में उसने 'स्वाभाविक' और ‘बाजार मूल्य' के भेद को स्पष्ट किया। 'स्वाभाविक मूल्य' से उसका अभिप्राय उस बिन्दु से है जिसके चारों ओर बाजार मूल्य चक्कर लगाता है और अन्त में उसके बराबर होने का प्रयत्न करता है। आश्चर्य है कि रिकार्डों स्वाभाविक मूल्य की स्पष्ट परिभाषा नहीं दे पाया और जो कुछ उसने लिखा, उससे केवल अनुमान ही लगाया जा सकता है। रिकार्डो ने मूल्य सम्बन्धी विश्लेषण को 'उपभोग मूल्य' तथा 'विनिमय मूल्य' के अन्तर के स्पष्टीकरण से आरम्भ किया है। वह कहता है कि “उपयोगिता विनिमय मूल्य का प्रमाण नहीं है किन्तु उसके लिए अत्यन्त आवश्यक है। जिन वस्तुओं में उपयोगिता होती है। उनका विनिमय मूल्य दो बातों पर निर्भर करता है। वस्तु की दुर्लभता और उसके उत्पादन में लगा हुआ श्रम मूल्य वस्तुओं जैसे तस्वीरों, मूर्तियाँ, पुराने सिक्कों, पुस्तकों इत्यादि का विनिमय मूल्य केवल दुर्लभता द्वारा ही निर्धारित होता है। वास्तव में वह इन वस्तुओं को इतनी अधिक सीमित समझता है कि उसने इसकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया। उसने तो साधारण जीवन की वस्तुओं के मूल्य निर्धारण की ही व्याख्या की है। उसने लिखा है, “वस्तुओं, उनके विनिमय मूल्य तथा उन बातों की जो उनकी सापेक्षिक कीमतों को नियमित करती है, की चर्चा करते हुए हमें सदैव ही ऐसी वस्तुओं को सम्मिलित करना चाहिए जिनकी मात्रा मानवीय श्रम द्वारा बढ़ायी जा सके और जिनके उत्पादन में प्रतियोगिता बिना रोक के चालू रहती है।” इसलिए उसका विचार था कि इन सभी वस्तुओं का विनिमय उनको उत्पन्न करने में लगे हुए श्रम के अनुपात में होता है।

विभिन्न व्यवसायों में एक दिन या एक घण्टे के श्रम की तुलना करना कोई सरल काम नहीं है। रिकार्डों को इसका पूरा ज्ञान था इसीलिए तो उसका कहना था कि, “श्रम के विभिन्न गुणों के बारे में जो अनुमान लगाये जाते हैं, उनका सभी व्यावहारिक उद्देश्यों की दृष्टि से काफी यथार्थता से बाजार में सामंजस्य हो जाता है, जो माप एक बार निर्धारित हो जाती है उसमें थोड़ा परिवर्तन ही होता है।" आगे चलकर रिकार्डों ने कहा है कि “जिस बात की ओर मैं पाठकों का ध्यान दिलाना चाहता हूँ उसका सम्बन्ध वस्तुओं के सापेक्षिक मूल्य के परिवर्तनों से है, न कि प्रत्येक वस्तु के अपने स्वतन्त्र मूल्य से। हम रिकार्डों के सिद्धान्त को संक्षेप में इस प्रकार दे सकते हैं, “पुनः उत्पन्नीय वस्तुओं का विनिमय, श्रम की उस मात्रा के अनुपात में होता है जो उनके उत्पादन के लिए आवश्यक है और श्रम की मात्रा को निर्धारित करने के लिए हम कुशल श्रमिक की एक दिन के श्रम की मजदूरी तथा अकुशल श्रमिक के एक दिन के श्रम से उसको प्रतिदिन प्राप्त होने वाली मजदूरी के अनुपात पर कर सकते हैं।" यद्यपि रिकार्डों ने घुमा-फिराकर अपने विचार को सिद्ध करने का प्रयत्न किया, किन्तु वह उस दोष को दूर नहीं कर पाया जिसके कारण उसका सिद्धान्त अव्यावहारिक प्रतीत होता है।

रिकार्डों के श्रम सिद्धान्त को व्यवहार मे लाने में एक दूसरी कठिनाई यह है कि चूँकि पूँजी श्रमिकों को उनके काम में सहायता देती है इसलिए उसको भी उत्पादन लागत में सम्मिलित करना चाहिए। किन्तु रिकार्डों केवल श्रम को ही उत्पादन लागत मानता है। रिकार्डों भी अपने सिद्धान्त के इस दोष से परिचित था। इसलिए उसने कहा था, "वस्तुओं का विनिमय मूल्य उन वस्तुओं के उत्पादन में व्यय किये गये श्रम की मात्रा के अनुपात में निर्धारित होता है, उसके तुरन्त उत्पादन पर व्यय किये गये श्रम के अनुसार नहीं, वरन् उन सभी मशीनों, औजारों पर व्यय किये गये श्रम के अनुसार भी जिनसे उस वस्तु के उत्पादन में सहायता प्राप्त होती है।” सभी वस्तुओं का मूल्य इसी सिद्धान्त द्वारा बदलता रहता है। यद्यपि रिकार्डों इस दोष को दूर करने का प्रयत्न किया, परन्तु आंशिक रूप से सफल रहा क्योंकि वह निश्चित नहीं कर पाया कि पूँजी के उपयोग के लिए ब्याज दिया जाय या नहीं। वह कहता था कि वास्तव में अचल पूँजी के उत्पादन में जो श्रम लगता है, उसी के बराबर ब्याज उस पूँजी के उपयोग के लिए दिया जाना चाहिए। सच तो यह है कि यदि ब्याज सदैव ही श्रम की उस मात्रा के अनुपात में हो जो पूँजीगत वस्तुओं के उत्पादन में खर्च हुआ तो कोई भी कठिनाई न हो, किन्तु रिकार्डों जानता था कि सदैव ही ऐसा नहीं होता और इसीलिए उसके विचार बड़े ही उलझे हुए दिखाई देते हैं। आगे चलकर उसने कहा कि विभिन्न वस्तुओं के विनिमय दर के परिवर्तन श्रम के मूल्य के परिवर्तनों के कारण ही उत्पन्न होते हैं। परन्तु ऐसा क्यों होता है? इसके उत्तर में उसने बताया कि, "उत्पादन के कार्य में जो पूँजी श्रम को सहयोग देती हो उसका ब्याज अथवा लाभ, श्रम के मूल्य के विपरीत दिशा में चलता है।"

रिकार्डों ने अपने मूल्य सिद्धान्त की व्याख्या जिस प्रकार से की, उससे वह त्रुटिपूर्ण हो गया। इसलिए अनेक अर्थशास्त्रियों ने उसकी आलोचना की।

वितरण का सिद्धान्त
(Theory of Distribution)

रिकार्डों ने मुख्य रूप से वितरण सम्बन्धी समस्याओं का अध्ययन किया था। उसने राष्ट्रीय आय के वितरण के महत्त्व को स्पष्ट किया और उसके लिए मूल्य सिद्धान्त को लागू करके अर्थशास्त्र के विकास में एक बहुत बड़ा योगदान दिया था। वह पहला व्यक्ति था जिसने वितरण सम्बन्धी समस्याओं का वैज्ञानिक विश्लेषण किया और राष्ट्रीय आय में योग देने वाले विभिन्न साधनों के हिस्सों को निर्धारित करने के लिए विस्तृत नियम बनाये। स्मिथ द्वारा छोड़े गये कार्यों को रिकार्डों ने कुछ अंश तक पूरा किया, किन्तु समस्या का समाधान पूरी तरह न हो सका क्योंकि उसकी शैली अस्पष्ट थी और उसके कथन में तर्क की कमी थी। ऐसा प्रतीत होता है कि वह कहना कुछ और चाहता था परन्तु कह कुछ और रहा था। उसका सिद्धान्त एकांगी है क्योंकि उसने केवल उत्पादन लागत को ही महत्त्व दिया। रिकार्डों का महत्त्व केवल इसीलिए है कि उसने वितरण सम्बन्धी समस्याओं के महत्त्व को इतना अधिक स्पष्ट कर दिया था कि उसके बाद लगभग सभी अर्थशास्त्रियों ने उन्हीं पर अपनी दृष्टि केन्द्रित की। रिकार्डों के अनुसार राष्ट्रीय आय के वितरण का क्रम इस प्रकार चलता है "लाभ ऊँची या नीची मजदूरी पर निर्भर करते हैं। मजदूरियाँ अनिवार्यताओं के मूल्य पर और अनिवार्यताओं के मूल्य मुख्य रूप से खाद्यान्न के मूल्य पर निर्भर करते हैं।” सीमान्त भूमि पर उत्पन्न होने वाले खाद्यान्न का विनिमय मूल्य उसकी श्रम लागत के अनुसार निर्धारित होती है। दीर्घकाल में मजदूरी में, खाद्यान्न के विनिमय मूल्य के बराबर होने की * प्रवृत्ति होती है और विनिमय दरें प्रतियोगिता द्वारा समान हो जाती है। सीमान्त उत्पत्ति का जो भाग शेष रह जाता है वह लाभ होता है, जिसकी दरें भी प्रतियोगिता द्वारा समान हो जाती है। अधिक उपजाऊ भूमि पर ही लगान उत्पन्न होता है। उद्योगों के सकल उत्पाद का वितरण इसी प्रकार होता है।

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न- भारत के प्राचीनकालीन आर्थिक विचारधारा के प्रमुख स्रोतों का उल्लेख कीजिए।
  2. प्रश्न- कौटिल्य रचित 'अर्थशास्त्र' में 'कल्याणकारी राज्य' की परिकल्पना को स्पष्ट कीजिए।
  3. प्रश्न- कौटिल्य की पुस्तक 'अर्थशास्त्र' में उल्लेखित विषयों की व्याख्या कीजिए।
  4. प्रश्न- प्राचीन भारतीय आर्थिक विचारधारा की मुख्य विशेषताएँ क्या थीं?
  5. प्रश्न- अर्थशास्त्र में उल्लिखित 'कृषि तथा पशुपालन' विषय पर टिप्पणी लिखिए।
  6. प्रश्न- कौटिल्य के राजस्व के संबंध में विचारों पर प्रकाश डालिए।
  7. प्रश्न- कौटिल्य के सार्वजनिक वित्त संबंधी विचारों पर प्रकाश डालिए।
  8. प्रश्न- कौटिल्य के कल्याणकारी राज्य की अवधारणा पर प्रकाश डालिए।
  9. प्रश्न- कौटिल्य के अनुसार, करारोपण राज्य के लिए क्यों आवश्यक है?
  10. प्रश्न- भारत में 19वीं शताब्दी में आर्थिक विचारधारा का विकास किन बातों से प्रभावित हुआ?
  11. प्रश्न- नरौजी के प्रमुख आर्थिक सिद्धान्तों की विवेचना कीजिए।
  12. प्रश्न- दादा भाई नौरोजी के निर्धनता सम्बन्धी विचार को समझाइये |
  13. प्रश्न- 'निष्कासन सिद्धान्त (The Drain Theory)' पर टिप्पणी कीजिए।
  14. प्रश्न- रोमेश चन्द्र दत्त का सामान्य परिचय दीजिए।
  15. प्रश्न- रोमेश चन्द्र दत्त के कृषि सम्बन्धी विचारों का वर्णन कीजिए।
  16. प्रश्न- "भारत की निर्धनता का कारण ब्रिटिश सरकार की शोषण नीति है।" रोमेश दत्त के इस कथन का विश्लेषण कीजिए।
  17. प्रश्न- "लगान की ऊँची दर भारतीय कृषि की दुर्दशा का एक प्रमुख कारण है।" स्पष्ट कीजिए।
  18. प्रश्न- रोमेश दत्त के आर्थिक विचारों का वर्णन कीजिए।
  19. प्रश्न- डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर के आर्थिक विचारों की व्याख्या कीजिए।
  20. प्रश्न- डॉ. राम मनोहर लोहिया के प्रमुख आर्थिक विचारों की व्याख्या कीजिए।
  21. प्रश्न- गाँधी जी के 'समाजवाद' दर्शन का वर्णन कीजिए।
  22. प्रश्न- गाँधीजी और नेहरू जी के आर्थिक विचारों की तुलना कीजिए।
  23. प्रश्न- गाँधीवाद तथा साम्यवाद में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  24. प्रश्न- गाँधीजी के प्रमुख आर्थिक विचारों की विवेचना कीजिए।
  25. प्रश्न- गाँधीजी के मशीन सम्बन्धी विचारों को बताइये।
  26. प्रश्न- "नेहरूवाद मार्क्सवाद और गाँधीवाद का विवेकपूर्ण सम्मिश्रण है।" संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  27. प्रश्न- पंडित दीनदयाल उपाध्याय की आर्थिक नीति की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  28. प्रश्न- पं. दीनदयाल उपाध्याय भारी उद्योगों को अमानवीय और तानाशाही प्रकृति का मानते थे। क्यों? स्पष्ट कीजिए।
  29. प्रश्न- पं. दीनदयाल उपाध्याय की विकेन्द्रीकृत अर्थव्यवस्था की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए।
  30. प्रश्न- पं. दीनदयाल उपाध्याय के समग्र मानवतावाद के दर्शन की व्याख्या कीजिए।
  31. प्रश्न- दीन दयाल उपाध्याय की एकीकृत आर्थिक नीति की व्याख्या कीजिए।
  32. प्रश्न- अर्थशास्त्र में 'आवश्यकता विहीनता' की परिभाषा के जन्मदाता प्रो. जे. के. मेहता हैं। इनके आर्थिक विचार समझाइए।
  33. प्रश्न- अमर्त्य सेन के 'निर्धनता' सम्बन्धी विचार लिखिए।
  34. प्रश्न- वैश्वीकरण पर अमर्त्य सेन के विचारों का विश्लेषण कीजिए।
  35. प्रश्न- विश्व व्यापार प्रणाली के सन्दर्भ में भगवती के विचारों का विश्लेषण कीजिए।
  36. प्रश्न- व्यापार उदारीकरण पर भगवती के विचारों का वर्णन कीजिए।
  37. प्रश्न- प्लेटो के प्रमुख आर्थिक विचारों की विवेचना कीजिए।
  38. प्रश्न- प्लेटो और अरस्तू के आर्थिक विचारों की तुलना कीजिये तथा आर्थिक विचारों के इतिहास में अरस्तू का महत्व बताइये।
  39. प्रश्न- प्राचीन आर्थिक विचारधाराओं की प्रमुख विशेषताएँ कौन-कौन सी थीं?
  40. प्रश्न- प्लेटो के 'साम्यवाद' की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए।
  41. प्रश्न- सेण्ट थॉमस एक्विनास के आर्थिक विचारों का वर्णन कीजिए।
  42. प्रश्न- उचित कीमत (Just price) सम्बन्धी सन्त थॉमस एक्विनास के विचारों का वर्णन कीजिए।
  43. प्रश्न- सन्त थॉमस एक्विनास के श्रम विभाजन सम्बन्धी विचारों की समीक्षा कीजिए।
  44. प्रश्न- वणिकवाद के उदय के मूल कारकों पर प्रकाश डालिए।
  45. प्रश्न- 'वणिकवाद' के पतन के प्रमुख कारणों की विवेचना कीजिए।
  46. प्रश्न- उन परिस्थितियों का आलोचनात्मक विवेचन कीजिए जिन्होंने वणिकवाद को बढ़ावा दिया और जो इसके पतन का कारण बनीं।
  47. प्रश्न- वणिकवाद के सिद्धान्त एवं नीतियाँ लिखिये।
  48. प्रश्न- वाणिकवाद से क्या आशय है?
  49. प्रश्न- वणिकवादी दर्शन के मुख्य तत्त्व क्या थे?
  50. प्रश्न- वणिकवाद का आर्थिक विचारों के इतिहास में क्या महत्व है?
  51. प्रश्न- वणिकवाद के ब्याज के सिद्धांत की संक्षिप्त विवेचना कीजिए।
  52. प्रश्न- नव-वणिकवाद के उदय के कारण क्या हैं? संक्षिप्त प्रकाश डालिए।
  53. प्रश्न- पुराने वणिकवाद तथा नव-वणिकवाद में समानताएँ क्या हैं?
  54. प्रश्न- सोना चाँदी का महत्व बताइये।
  55. प्रश्न- वणिकवाद की एक राष्ट्रीय नीति के सन्दर्भ में चर्चा कीजिए।
  56. प्रश्न- वणिकवादियों के 'राज्य सम्बन्धी विचार' क्या थे? स्पष्ट कीजिए।
  57. प्रश्न- 'वणिकवाद एवं राज्य समाजवाद' पर टिप्पणी कीजिए।
  58. प्रश्न- थॉमस मून के आर्थिक विचारों का वर्णन कीजिए।
  59. प्रश्न- प्रकृतिवाद क्या है? प्रकृतिवादी वणिकवादियों का क्यों विरोध करते हैं?
  60. प्रश्न- प्रकृतिवाद और वणिकवाद के अर्थशास्त्रीय दर्शन में क्या मूलाधारीय अन्तर है? उनके समाज की आर्थिक दशाओं में प्रकृतिवादियों की देन की व्याख्या कीजिये।
  61. प्रश्न- प्रकृतिवाद के उदय के कौन-कौन से कारण उत्तरदायी थे?
  62. प्रश्न- आर्थिक तालिका अथवा धन के परिभ्रमण से क्या आशय है?
  63. प्रश्न- आर्थिक तालिका की दुर्बलताओं की संक्षिप्त विवेचना कीजिए।
  64. प्रश्न- 'प्रकृतिवादी सिद्धान्त' क्या है? स्पष्ट कीजिए।
  65. प्रश्न- समान त्याग के सिद्धान्त से क्या अभिप्राय है?
  66. प्रश्न- "सहयोगी समाजवादी" से क्या तात्पर्य है?
  67. प्रश्न- सर विलियम पैटी के आर्थिक विचारों का वर्णन करें।
  68. प्रश्न- तुर्गो (Turgot) के आर्थिक विचारों का वर्णन कीजिए।
  69. प्रश्न- लॉक के मूल्य सम्बन्धी विचारों का वर्णन कीजिए।
  70. प्रश्न- लॉक के सम्पत्ति सम्बन्धी विचारों का वर्णन कीजिए।
  71. प्रश्न- लॉक के मुद्रा सम्बन्धी विचारों का वर्णन कीजिए।
  72. प्रश्न- लॉक का विदेशी व्यापार सम्बन्धी व्यापार संतुलन के सिद्धान्त का वर्णन कीजिए।
  73. प्रश्न- "डेविड ह्यूम (David Hume) को मुद्रावाद का सूत्रधार कहा जाता है।" इस कथन की समीक्षा कीजिए।
  74. प्रश्न- एडम स्मिथ की पुस्तक 'राष्ट्रों का धन' (Wealth of Nations) का तत्कालिक आर्थिक विचारधारा पर क्या प्रभाव पड़ा?
  75. प्रश्न- एडम स्मिथ के आर्थिक विचारों के विकास में योगदानों का विवरण दीजिए तथा उनके, आर्थिक सिद्धान्तों का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
  76. प्रश्न- एडम स्मिथ की व्यवस्था के अन्तर्गत " श्रम विभाजन" और "बाजार के विस्तार" की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
  77. प्रश्न- 'परम्परावाद' क्या है? स्पष्ट कीजिए।
  78. प्रश्न- आर्थिक विचारों के इतिहास में स्मिथ के स्थान को चिन्हित कीजिए।
  79. प्रश्न- अहस्तक्षेप नीति क्या है?
  80. प्रश्न- स्मिथ के सिद्धान्तों का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
  81. प्रश्न- स्मिथ का आशावाद क्या है?
  82. प्रश्न- एडम स्मिथ के पूँजी संचय सम्बन्धी विचारों का वर्णन कीजिए।
  83. प्रश्न- वितरण सम्बन्धी एडम स्मिथ के विचारों का विश्लेषण कीजिए।
  84. प्रश्न- एडम स्मिथ के व्यापार सम्बन्धी विचारों को स्पष्ट कीजिए।
  85. प्रश्न- एडम स्मिथ के आशावाद पर संक्षिप्त लेख लिखिए।
  86. प्रश्न- स्मिथ के प्रकृतिवाद पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  87. प्रश्न- "रिकार्डों का मुख्य योगदान मूल्य सिद्धान्त तथा वितरण सिद्धान्त के क्षेत्र में है। " व्याख्या कीजिए।
  88. प्रश्न- रिकार्डो के अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के सिद्धान्त की आलोचनात्मक विवेचना कीजिए।
  89. प्रश्न- उन परिस्थितियों का वर्णन कीजिये जिनसे प्रकृतिवाद का जन्म हुआ। प्रकृतिवाद का आर्थिक विचारों में क्या योगदान है?
  90. प्रश्न- रिकार्डों के अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के सिद्धान्त की चर्चा कीजिए।
  91. प्रश्न- डेविड रिकार्डों के 'मजदूरी सिद्धान्त' पर टिप्पणी कीजिए।
  92. प्रश्न- रिकार्डों का तुलनात्मक लागत सिद्धान्त बताइए।
  93. प्रश्न- रिकार्डों की प्रसिद्ध पुस्तक 'The Principles of Political Economy and Taxation' पर टिप्पणी लिखिए।
  94. प्रश्न- रिकार्डो के लगान सिद्धान्त की आलोचना कीजिए।
  95. प्रश्न- माल्थस के 'जनसंख्या सिद्धान्त' की व्याख्या कीजिए तथा इसकी आलोचनाओं को बताइए।
  96. प्रश्न- नव-माल्थसवाद क्या है? इसके प्रमुख आर्थिक विचारों की विस्तृत विवेचना कीजिए।
  97. प्रश्न- अति उत्पादन तथा लगान पर माल्थस के विचारों की संक्षिप्त व्याख्या कीजिए।
  98. प्रश्न- माल्थस के 'लगान' सम्बन्धी विचार को स्पष्ट कीजिए।
  99. प्रश्न- माल्थस के 'प्रभावी माँग के सिद्धान्त' का विश्लेषण कीजिए।
  100. प्रश्न- माल्थस और रिकार्डो को निराशावादी क्यों कहा जाता है? स्पष्ट कीजिए।
  101. प्रश्न- माल्थस के विचारों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक क्या थे? विवेचन कीजिए।
  102. प्रश्न- 'मार्क्स अन्तर्राष्ट्रीय समाजवाद के पिता के रूप में था।' स्पष्ट कीजिए।
  103. प्रश्न- कार्ल मार्क्स के 'द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद' को स्पष्ट कीजिए।
  104. प्रश्न- मार्क्स के 'अतिरेक मूल्य सिद्धान्त' की व्याख्या कीजिए तथा इसकी प्रमुख आलोचनाओं को स्पष्ट कीजिए।
  105. प्रश्न- मार्क्स के आर्थिक विघटन सम्बन्धी विचार की व्याख्या कीजिए।
  106. प्रश्न- "मार्क्सवाद परम्परावाद के तने पर उगी हुई शाखा मात्र है।" उक्त कथन की व्याख्या कीजिए।
  107. प्रश्न- क्या कार्ल मार्क्स को प्रतिष्ठित सम्प्रदाय का अर्थशास्त्री माना जा सकता है? विस्तार से समझाइए।
  108. प्रश्न- सहयोगी समाजवाद, राज्य समाजवाद और वैज्ञानिक समाजवाद की तुलना कीजिए और उनका अन्तर भी स्पष्ट कीजिए।
  109. प्रश्न- कार्ल मार्क्स द्वारा प्रतिपादित आधुनिक समाजवाद के मुख्य सिद्धान्तों की व्याख्या कीजिए।
  110. प्रश्न- सिसमाण्डी के आर्थिक विचारों का वर्णन कीजिए।
  111. प्रश्न- "सिसमाण्डी समाजवादी विचारक था। " सिद्ध कीजिए।
  112. प्रश्न- मार्क्सवाद की विचारधारा के मूल तत्त्व कौन-कौन से थे?
  113. प्रश्न- मार्क्सवाद की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
  114. प्रश्न- वर्ग संघर्ष पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये।
  115. प्रश्न- जे. एस. मिल के प्रमुख आर्थिक विचारों का उल्लेख कीजिए।
  116. प्रश्न- जे. एस. मिल के आर्थिक विचारों पर प्रभाव डालने वाले मुख्य घटकों की विवेचना कीजिए।
  117. प्रश्न- जे आर. हिक्स के विचारों की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए।
  118. प्रश्न- "मिल के द्वारा परम्परावादी अर्थशास्त्र पूर्ण रूप से विकसित किया गया और उसी के साथ उसका पतन प्रारम्भ हुआ।" इस कथन की व्याख्या कीजिए।
  119. प्रश्न- जे. एस. मिल परम्परावादी सिद्धान्तों के किन-किन नियमों से सहमत तथा किन-किन नियमों से असहमत था? स्पष्ट कीजिए।
  120. प्रश्न- जे. एस. मिल के स्वहित सिद्धान्त की संक्षिप्त विवेचना कीजिए।
  121. प्रश्न- जे. एस. मिल के स्वतन्त्रता प्रतियोगिता के सिद्धान्त की विवेचना कीजिए।
  122. प्रश्न- जे. एस. मिल के जनसंख्या सिद्धांत की संक्षिप्त विवेचना कीजिए।
  123. प्रश्न- मिल के समाजवादी विचारों की आलोचना कीजिए।
  124. प्रश्न- 'जे. एस. मिल समाजवादी था'। इस कथन के पक्ष में तर्क दीजिए।
  125. प्रश्न- जे. एस. मिल के आर्थिक विचारों का मूल्यांकन कीजिए।
  126. प्रश्न- जे. बी. से के आर्थिक विचारों का वर्णन कीजिए।
  127. प्रश्न- जे. एस. मिल के मजदूरी सिद्धान्त का वर्णन कीजिए।
  128. प्रश्न- मिल के अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार सिद्धान्त का वर्णन कीजिए।
  129. प्रश्न- 'मूल्य व वितरण' के क्षेत्र में मार्शल के योगदान का वर्णन कीजिए।
  130. प्रश्न- स्पष्ट व्याख्या कीजिए कि नव-परम्परावाद क्या है? इस सन्दर्भ में मार्शल के आर्थिक सिद्धान्त के क्षेत्र में योगदान का विश्लेषण कीजिए।
  131. प्रश्न- नव परम्परावाद क्या है? परम्परावादी एवं नव परम्परावादी विचारों में अन्तर बताइये।
  132. प्रश्न- प्रकृतिवाद को जन्म देने वाली शक्तियों की व्याख्या कीजिए तथा आर्थिक विचारधारा में उसका मुख्य योगदान बताइये।
  133. प्रश्न- मार्शल के निरंतरता सिद्धांत पर संक्षिप्त प्रकाश डालिए।
  134. प्रश्न- मार्शल के आभास लगान के संबंध में विचारों की विवेचना कीजिए।
  135. प्रश्न- प्रतिनिधि फर्म के विषय में मार्शल के विचारों पर प्रकाश डालिए।
  136. प्रश्न- मार्शल ने अल्पकालीन व दीर्घकालीन विवाद के हल को कैसे सुलझाया?
  137. प्रश्न- परम्परावादी तथा नवपरम्परावादी विचारों में अन्तर कीजिए।
  138. प्रश्न- मार्शल के उपयोगितावाद पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये।
  139. प्रश्न- शुद्ध उत्पत्ति का सिद्धान्त बताइए।
  140. प्रश्न- राबिन्स के विचारों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
  141. प्रश्न- पीगू के आर्थिक कल्याण सम्बन्धी विचारों का विश्लेषण कीजिए।
  142. प्रश्न- पीगू ने अर्थशास्त्र का क्षेत्र निर्धारण किस प्रकार किया है?
  143. प्रश्न- पीगू के रोजगार सम्बन्धी विचार का वर्णन कीजिए।
  144. प्रश्न- पीगू के समाजवादी विचारों का वर्णन कीजिए।
  145. प्रश्न- शुम्पीटर के आर्थिक विचारों का वर्णन कीजिए।
  146. प्रश्न- सीमान्तवाद क्या है? सीमान्तवादियों का अर्थशास्त्र में क्या योगदान रहा है?
  147. प्रश्न- क्रूनो के आर्थिक विचारों का वर्णन कीजिए।
  148. प्रश्न- मूल्य निर्धारण के सम्बन्ध में क्रूनो के विचारों का विश्लेषण कीजिए।
  149. प्रश्न- गोसेन के आर्थिक विचारों पर प्रकाश डालिए।
  150. प्रश्न- जेवन्स के मूल्य सिद्धान्त का वर्णन कीजिए।
  151. प्रश्न- प्रो. एल. वालरा (वालरस) के बाजार सन्तुलन सिद्धान्त की विवेचना कीजिए।
  152. प्रश्न- सिसमण्डी के आर्थिक विचारों की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिये।
  153. प्रश्न- सीमान्तवादी क्रान्ति की व्याख्या कीजिए तथा इस सम्बन्ध में मेंजर के विचारों की विवेचना कीजिए।
  154. प्रश्न- जेवन्स के प्रमुख आर्थिक विचारों की विवेचना कीजिए।
  155. प्रश्न- कार्ल मेंजर के द्रव्य सम्बन्धी विचारों को संक्षेप में लिखिए।
  156. प्रश्न- विकस्टीड के आर्थिक विचारों का वर्णन कीजिए।
  157. प्रश्न- वालरस के उपयोगिता सम्बन्धी विचार का वर्णन कीजिए।
  158. प्रश्न- वालरस के साम्य सम्बन्धी विचारों का वर्णन कीजिए।
  159. प्रश्न- कार्ल मेंजर के आर्थिक विचारों पर प्रकाश डालिए
  160. प्रश्न- कार्ल मेंजर के विनिमय सम्बन्धी विचारों का वर्णन कीजिए।
  161. प्रश्न- कार्ल मेंजर के अनुसार वस्तुओं के वर्गीकरण का विश्लेषण कीजिए।
  162. प्रश्न- कार्ल मेंजर के मुद्रा सम्बन्धी विचारों का विश्लेषण कीजिए।
  163. प्रश्न- जेवेन्स के मूल्य सिद्धान्त का विश्लेषण कीजिए।
  164. प्रश्न- जेवेन्स के आर्थिक विचारों का विश्लेषण कीजिए।
  165. प्रश्न- यूजिन वॉन बाम बावर्क के आर्थिक विचारों का वर्णन कीजिए।
  166. प्रश्न- बाम बावर्क के मूल्य सिद्धान्त का वर्णन कीजिए।
  167. प्रश्न- नटविकसेल के आर्थिक विचारों का वर्णन कीजिए।
  168. प्रश्न- इविंग फिशर के प्रमुख आर्थिक विचारों का वर्णन कीजिए।
  169. प्रश्न- "मुद्रा प्रसार व संकुचन दोनों हानिकारक हैं।" इविंग फिशर के इस विचार का विश्लेषण कीजिए।
  170. प्रश्न- फिशर के मुद्रा के परिमाण सिद्धान्त का वर्णन कीजिए।

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